Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 138, Verse 51
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 138, verse 51 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 138 · श्लोक 51
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हिन्दी अर्थ
दृश्य के
दर्शन से मेरा क्या मतलब, मैं चिरकाल तक चुपचाप चित्तव्यापाररहित होकर स्थित रहूँ, अन्दर इस
तरह की शान्तिरूप संवित् जब तक रहती है तबतक सुषुप्ति है सुषुप्ति का इससे अतिरिक्त दूसरा
स्वरूप नहीं हे