Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 138, Verse 53
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 138, verse 53 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 138 · श्लोक 53
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हिन्दी अर्थ
जाग्रत ओर स्वप्नो के भ्रमण से में बहुत थक गया हू । मुझे
विशेष संवित् से क्या करना है । मैं कुछ कालतक मन के व्यापार से रहित शान्त रहूँ, इस प्रकार का
संकल्प होने पर एकमात्र गाढ़ निद्राकार परिणाम ही सुषुप्ति है, उससे अतिरिक्त सुषुप्ति नहीं है