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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 14, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 14, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 14 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

भुशुण्ड उवाच । तस्य शक्रस्य कुलजः कश्चिदासीत्सुराधिपः । तत्रोत्तमगुणः श्रीमान्पाश्चात्या यस्य सा तनुः ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

भुशुण्डजी ने कहा : हे विद्याधर, पूर्वोक्त उस इन्द्र के कुल में उत्तम गुणों से पूर्ण श्रीसम्पन्न कोई इन्द्र हुआ । उस देवलोक में उसका वह अन्तिम शरीर था

सर्ग सन्दर्भ

तेरहवाँ सर्ग समाप्त चौदहवाँ सर्ग उस कुल में उत्पन्न इन्द्र की बिस तन्तु मँ जगत्‌ की रचना तथा सब तरह के विचारकर देखने पर ब्रह्दृष्टि आकाश की इन्द्रता का वर्णन।