Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 14, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 14, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 14 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
अथेन्द्रकुलपुत्रस्य तस्य तत्र बभूव ह ।
प्रतिभाज्ञानसंप्राप्तिर्बृहस्पतिगिरोदिता ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
कुछ दिनों के बाद उस देवलोक में
इन्द्र के वंश में उत्पन्न हुए लड़के को बृहस्पति की उपदेशवाणी से आत्म-तत्त्वसाक्षात्कार ज्ञान की
प्राप्ति हुई