Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 14, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 14, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 14 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
विद्याधरकुलाधीश इत्यद्यैव स देवराड् ।
तस्येन्द्रस्य कुलोत्पन्न इति विद्धि यथास्थितम् ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
हे विद्याधर कुलाधीश, इस रीति से उस त्रसरेणु के अन्तर्गत इन्द्र के कुल में उत्पन्न वह इस
ब्रह्माण्ड में भी देवों का राजा बनकर स्थित है, यह तुम जान लो