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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 14, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 14, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 14 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

ततो हृदयबीजस्थप्राङ्मुख्याभ्यासयोगतः । बिसबालनिवासादिवृत्तान्तमनुभूतवान् ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

इस ब्रह्माण्ड का इन्द्र बन जाने के बाद, उसने हृदय में बीज के सदुश संस्काररूप से स्थित पूर्वकाल के ज्ञानयोगाभ्यासरूप योग से बिसतन्तु के भीतर स्थित अपने प्राक्तन वृत्तान्तों का स्मरण किया