Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 141, Verse 52
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 141, verse 52 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 141 · श्लोक 52
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हिन्दी अर्थ
मेरी रक्षा करने
में तत्पर मेरे सामने बैठे हुए शिष्यं का केवल एक मुहूर्तं ही समय बीता था