Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 141, Verse 53
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 141, verse 53 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 141 · श्लोक 53
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हिन्दी अर्थ
जिस प्राणी के
हृदय में में प्रविष्ट हुआ था वह भी किसी उत्सव में प्राप्त हुए अन्न से तृप्त होकर पीठ के बल सुख
से सोया था