Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 141, Verse 54
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 141, verse 54 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 141 · श्लोक 54
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हिन्दी अर्थ
वह आश्चर्य देखकर मैंने किसी से कुछ नहीं कहा । कौतुकवश मैं पुनः उसी के
दृश्य में प्रविष्ट हो गया