Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 141, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 141, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 141 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
पतन्तीभिः सुरस्त्रीभिर्द्विगुणाग्निशिखालवः ।
पतदङ्गारधारौघकणसीकरदन्तुरः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
व्याध ने कहा : प्रभो, यह यदि असत् है, केवल स्वप्नदृष्ट
भ्रान्तिरूप ही है तो हे कल्याणो के वेत्ता महामुने, इसके वर्णन से क्या लाभ है ?