Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 144, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 144, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 144 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
चिच्चमत्कारमात्रं स्वं स्वात्माङ्गं दृश्यमद्वयम् ।
सरूपमेव नीरूपं सकारणमकारणम् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे स्वप्न देखनेवाले दिखाई देनेवाले स्वप्नलोक के मनुष्यों के पिता आदि
कारण काल्पनिक हैँ वास्तविक नहीं है, वैसे ही जाग्रतरूप स्वप्न में भी दृश्य लोगों के पिता आदि
कारण काल्पनिक ही हैं, वास्तविक नहीं है