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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 144, Verse 24

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 144, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 144 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

एवं चित्परमाण्वन्तर्जगद्भावमिदं स्थितम् । तदनन्यात्म चाभोगि स्वप्नादर्शतलेष्विव ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे तुम अपने स्वप्ननगर की कल्पना करते हो वैसे ही ब्रह्म ने सृष्टि के आरम्भ में कार्यकारणता का संकल्प किया था । संकल्पमय इस सृष्टि में वैसी कार्यकारणता आज भी स्थित है