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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 144, Verse 74

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 144, verse 74 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 144 · श्लोक 74

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

जो म्लेच्छ देशों में मरे ओर जलकर राख हो गये वे यहाँ आकर अपना वृत्तान्त कहकर फिर चले जाते हैं, वे अविनाशी ही हैं इसमें कहना ही क्या है ?