Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 145, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 145, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 145 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
हेलावलितधम्मिल्लमुक्तमालतिकालताः ।
इव बालाङ्गना नृत्यं तन्वानास्तनुगात्रिकाः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
अव अन्य द्वारा निर्धारित स्वप्नदर्शन के प्रकार का अनुवाद कर खण्डन करते हैँ ।
स्वप्न में जो जाग्रत् का संस्कार है, वह जाग्रत् द्वारा किया हुआ अपूर्वरूप है उस अजाग्रत्रूप
जाग्रत्आभास को जाग्रत्-अनुभव ने बनाया ऐसा कोई स्वप्नस्वरूपवेत्ता कहते हैं