Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 145, Verse 38

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 145, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 145 · श्लोक 38

संस्कृत श्लोक

साद्रिद्यूर्वीनदीशानां वनभूग्रामपूर्दिशाम् । कम्पं भयोन्मुखाङ्गानां बुद्बुदानामिवार्णवे ॥ ३८ ॥

हिन्दी अर्थ

चित्स्वभाव होने से जन्मविनाशशून्य यह ब्रह्म ही इस प्रकार देदीप्यमान सर्ग आदि शब्दों के पयार्यरूप से भासता है