Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 146, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 146, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 146 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
तेनान्नलवशैलोच्चपूरेण प्रतिपिण्डितः ।
सुषुप्तमन्धतामिश्रमहमन्वभवं घनम् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
कान, त्वचा, नेत्र, नाक, जीभ, इच्छाप्रधान अन्तःकरण चतुष्टय
का संघातरूप ओर पंच प्राणों से युक्त आतिवाहिक शरीर ही कूटस्थ चिदाभास से संवलित होकर
जीव कहलाता है