Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 146, Verse 71
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 146, verse 71 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 146 · श्लोक 71
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हिन्दी अर्थ
विषम वात, पित्त धातुवाले पुरुष इस प्रकार के अनेक दृश्यों को स्वप्न की तरह बाहर ही देखते हैं
और अनुभव करते हैं