Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 147, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 147, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 147 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
सुरासुरनराधारगर्भगर्भमनोहरम् ।
पृथक्कोष्ठस्थबीजौघसंपूर्णमिव दाडिमम् ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
उत्पन्न होता है ? अन्यता का प्रयोजक जन्म क्या है, अथवा सर्वदृश्यप्रलय में अन्य सुषुप्ति क्या
है ? इसे कृपया आप समझाइये