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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 147, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 147, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 147 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

न नश्यति स्मृतिर्यस्य विमला बोधशालिनी । अयं द्वैतपिशाचस्तं मनागपि न बाधते ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

प्रत्यक्षतः अनुभवारूढ वस्तुओ का अपलाप करना किसी प्रकार भी संभव नही है, इस शंका का दृष्टान्तों द्वारा निरास करते हैं। यद्यपि स्वप्न और संकल्प के नगर अनुभवारुढ़ होते हैं फिर भी जैसे उनका वास्तविक रूप कुछ भी नहीं है वैसे ही सर्ग के आदि मेँ जगत्‌ का तनिक भी स्वरूप नहीं है