Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 148, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 148, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 148 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
अथाकारादि यन्नाम कल्प्यते कारणं विदः ।
तदकारणकं सर्गः स्यादनन्यन्न वै चितेः ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
जिन सत्पुरुषो को अभ्यास से साधु-सन्त ओर सत्शास्त्रों के संग से
बोध हो जाता है, वह बोध जो एक बार उदित हो गया तो फिर कदापि अपने उदय को नहीं भूलता सदा
ही ब्रह्मानुसन्धानरूप से रहता है, उन्हे यह द्वैत बाधा नहीं पहुँचाता