Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 149, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 149, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 149 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
संस्मरात्मानमखिलं कस्त्वं क्वेह स्थितोऽसि च ।
क्वाहं वा किमिदं दृश्यं किं सारं किंचिदेव च ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
अतः एक सद् ब्रह्म ही सर्वात्मक (सर्वरूप) है उससे अन्य कुछ नहीं है, इसलिए
उससे अतिरिक्त सत्य या असत्य क्या होगा ? अर्थात् कुछ भी नहीं