Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 149, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 149, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 149 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
हो ऐसा, इससे प्रकृत मे क्या आया ? इस पर कहते हैं।
जैसे जमा हुआ कड़ा घी ही कुछ पिघलता हे कुछ पिघला हुआ ही जमकर फिर कडा हो जाता है यों
दो घृतो में परस्पर भेद नहीं है क्योकि वही यह घृत है एेसी प्रत्यभिज्ञा दोनों अवस्थाओं में होती है, हे
महामते, वैसे ही तुम जाग्रत् ही यह स्वप्न है ऐसा जानो ओर स्वप्न को जाग्रत् जानो, ये दोनों एक
अविनाशी ब्रह्म ही हैं