Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 15, Verse 14

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 15, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 15 · श्लोक 14

संस्कृत श्लोक

अर्हत्वं नाम तत्किंचिद्विद्याधर न विद्यते । अकारणमवस्तुत्वाच्छशशृङ्गमिवोदितम् ॥ १४ ॥

हिन्दी अर्थ

तत््वद्वष्टि स्रे अहंकार को असरूप देखना ही इसका परिमार्जन हैं / इसलिए हे विद्याधर, परमार्थ में यह अहंभाव कुछ नहीं है । अवस्तुरूप होने से खरगोश के सींग के समान बिना कारण ही यह उदित है