Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 15, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 15, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 15 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

वासनारससंसिक्तादहंबीजकणादयम् । ब्रह्माद्रौ व्योमविपिने जायते त्रिजगद्द्रुमः ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

वासनारूपी रस से सींचे गये अहंभावरूपी बीजकण से ब्रह्मरूपी पर्वत के ऊपर अव्याकृत आकाशरूपी जंगल में यह त्रिलोकरूपी वृक्ष उत्पन्न होता है