Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 15, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 15, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 15 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
तारकापुष्पनिकरो विलीनाचलपल्लवः ।
सरित्सारशिरापूरो वासनासारतत्फलः ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
इस वृक्ष के सभी तारे पुष्प समूह हैं, मेघमिहिकारूपी वन से ढके समस्त पर्वत इसके पल्लव
हैं, गंगा आदि सब नदियाँ इसकी नाड़ियों के प्रवाह हैं तथा हे विद्याधर, वासनारूपी बीजांशों
से परिपूर्ण अनेकविध भोग ही तो इसके सुन्दर फल हैं