Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 15, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 15, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 15 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
जरामरणमोहादिवीचीचयचमत्कृतिः ।
उत्पन्नध्वंसिदेहादिबिन्दुवृन्दैकबन्धुरः ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
यह जरा-
मरण ओर मोहादिरूपी तरगों के समूहरूप चमत्कार से परिपूर्ण है तथा उत्पत्ति ओर विनाशशील
देहादि पदार्थरूपी बिन्दु ओं के वृन्द से अत्यन्त सुन्दर है