Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 150, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 150, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 150 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
मेरा यह प्रश्न सुनकर, मेरी ओर देखकर, विचारकर मुस्करा रहे
उन मुनि महाराज ने अन्यमनस्क से होकर अमृत के झरने के समान मनोहर श्लाघ्य वचन कहा