Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 150, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 150, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 150 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
समागत अन्य मुनि ने कहा : हे साधुवर, अन्तःकरण के यह चित् है, यह अचित् है, ऐसे विवेक से
सम्पन्न होनेपर इस दृश्य का जो सत् या असत् कारण है उसे आप भलीभाँति जानते हैं। उसे किससे
जानते हैं, यह आप मुझसे कहिये