Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 150, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 150, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 150 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
हे मुने, अलीक (मिथ्या) यह सब
केवल स्वप्नमात्र का भान है ऐसा आप क्यों नहीं जानते, क्योकि मैं आपके लिए स्वप्न नर हूँ और आप
भी मेरे लिए स्वप्न पुरुषतुल्य हैं