Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 150, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 150, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 150 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
इस प्राणी के समान दूसरा भी प्राणी अन्य प्रजाओं का विराट आत्मा होगा
ऐसी संभावना होती है। उस देह में वही सुख-दुःख, सम्पत्ति, विपत्ति, पुण्य-पापरूप कर्म आदि का
भोक्तारूप से कारण है