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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 150, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 150, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 150 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

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हिन्दी अर्थ

उन प्राणियों का एक ही समय में परिपाक को प्राप्त हुआ दुष्ट कर्म भी उसमें है, ऐसा कहते हैं। हे सत्पुरुष, विराट्‌ में सब प्राणियों के कुछ दुष्कर्मों के रहनेपर जैसे अनेक पेड़ोंपर व्र गिरता है वैसे ही अनेकों पर एकसाथ दुःख आदि का पहाड़ गिरता है