Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 150, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 150, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 150 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
वैसा कर्म यदि चिति से ही पहले कल्पित होता है, तो चिति उक्त कर्मफलभागिनी होती है अन्यथा
नहीं होती है, ऐसा कहते हैं।
कर्म-कल्पना से चिति कर्मफलभागिनी होती है यदि चिति कर्मों की कल्पना से निर्मुक्त हो तो
कर्मफलभागिनी नहीं होती