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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 150, Verse 24

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 150, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 150 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

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हिन्दी अर्थ

जहाँ पर जो जो कल्पना थोड़ी या घनी जेसी उदित होती है वहाँ वह वह कल्पना वैसी ही सहेतुककी कल्पना से सहेतुक और अहेतुककी कल्पना से अहेतुक होती है