Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 150, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 150, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 150 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
यह स्वप्नभ्रम कोई तो बिना कारण के ही प्रतीत होता है चूँकि
सत् असत् रूप है, अतएव शून्य (मिथ्याभूत) है