Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 150, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 150, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 150 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
TODO
हिन्दी अर्थ
कहीं पर जैसे कि दूध आदि में दधिभाव की प्राप्ति के लिए जमावन, समय, गर्मी आदि कारण की
कल्पना की जाती है, वायु आदि के धनीभाव, तरलता आदि के लिए उसकी कल्पना करना शक्य नहीं
हैं ऐसा कहते हैं।
जहाँ पर विद्वान द्वारा कारण की कल्पना की जाती है वहाँ पर कारणरूप सार है जहाँपर कारण की
कल्पना नहीं की जाती वह अकारण है