Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 150, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 150, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 150 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
अज्ञानवश विस्मृत यह जगत् असत् होता हुआ ही पहले
आँधी के बवंडर की तरह प्रकाश में आया। जैसे प्रकाश में आया वैसा ही अद्यावधि स्थित है