Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 151, Verses 15–16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 151, verses 15–16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 151 · श्लोक 15,16
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हिन्दी अर्थ
ओह, जैसे केवल भ्रमरूप वेताल से बालक छला जाता है वैसे ही दृश्य की उपलब्धि से, जो कि केवल
भ्रान्तिमात्र है, ज्ञानवान् भी मैं छला गया हूँ, यह कम दुःख की बात नहीं है । ओह, विस्तार को प्राप्त हो
रहे इस सर्वार्थशून्य (तुच्छातितुच्छ) मिथ्याज्ञान से (भ्रान्तिसे), मे किस दशा को पहुँचाया गया हूँ, यह
महान् आश्चर्य की बात है