Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 151, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 151, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 151 · श्लोक 14
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हिन्दी अर्थ
अपनी उस गृहस्थाश्रम अवस्था पर शोक करते हैं।
अहो, जैसे थकावट से चूर चूर हुआ प्यासा अज्ञानी पथिक जल के लिए भटकता हुआ मिथ्याभूत
मृगतृष्णा से दुःखी होता है, वैसे ही विषयभोग की आसक्ति से मैं इस अवस्था को प्राप्त हुआ हूँ