Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 151, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 151, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 151 · श्लोक 18
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हिन्दी अर्थ
न तो मेँ हूँ, न यह स्त्री है, यह घर है और न यह भ्रम है - यह सब मिथ्या
है फिर भी सत् की तरह स्थित है । यही महान् आश्चर्य है