Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 151, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 151, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 151 · श्लोक 19
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हिन्दी अर्थ
इस समय यहाँ मुझे क्या करना
चाहिये । मेरे बन्धन को तोड़ डालनेवाला आशभ्यन्तरिक ब्रह्माकारवृत्तिरूप अंकुर है। लेकिन वह भी तो
छेद्य ही हे, इसलिए तब तक उसी का परित्याग करता हूँ