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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 151, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 151, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 151 · श्लोक 22

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

इसलिए, ज्ञानसम्पन्न महामुनिजी से ऐसा सब मैं कहूँगा यह सोचकर मैंने वहाँ उन मुनिजी से यह कहा