Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 151, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 151, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 151 · श्लोक 25
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हिन्दी अर्थ
हे
वृत्तान्तअज्ञ, अथवा जाओ, स्वयं जाकर अपने आप ही उस वृत्तान्त को देखो। जैसी घटना हुई है उसे
देखो, देखकर अन्त में जान जाओगे