Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 151, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 151, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 151 · श्लोक 26
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हिन्दी अर्थ
मुनि महाराज के यह कहनेपर अपने पुराने शरीर का
खयालकर वहाँ जाने के लिए मैं तैयार हुआ । वहाँ जाने की इच्छा से मेने स्वप्नभूत सत्ता से पार्थिव
शरीर ही मैं हूँ यों कल्पना से प्राप्त रूप का त्याग कर प्राणों से उपहित चिदात्मरूप अपने जीव को प्राण
द्वारा पवन से संयोजित किया