Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 151, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 151, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 151 · श्लोक 27
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हिन्दी अर्थ
हे मुनिमहाराज, जब तक मैं अपने पुराने शरीर को देखकर
लौटता तब तक आप कृपया यहीं रहें, यह कहकर मैं वायु में प्रविष्ट हुआ