Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 151, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 151, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 151 · श्लोक 35
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
यह सब मैंने मुनि के समीप
जाकर उनसे पूछा । महाशय मुनि महाराज ने मुझसे कहा : हे कमलनयन, शरीर का वृत्तान्त मुझसे
उपदिष्ट उपाय के बिना ही तुम स्वयं अपनी बुद्धि से कैसे जान गये ?