Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 151, Verse 45
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 151, verse 45 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 151 · श्लोक 45
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हिन्दी अर्थ
चारों ओर से आग से घिरे होने के कारण अग्निवृक्ष से बने हुए ताल, तमाल आदि वृक्षपंक्तियों के
तड़ातड़ गिरने से तथा उत्पात अग्नि के समान और उत्पात मेघ के समान उनके फटने के कोलाहल
से वह अग्नि निबिड हो गई थी