Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 151, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 151, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 151 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
ततो न ज्ञायते नासीत्क्वाश्रमः क्व तनू तथा ।
क्व पेटकं बहूनां तत्स्वप्नपूर्जाग्रतो यथा ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
अग्नि ने कहा : हे विपश्चित्, उस समय मुनि का वह वचन सुनकर बेचारा व्याध स्वप्न में
उद्भूत आपको उपदेश देनेवाले मुनि महाराज इस समय मेरे प्रत्यक्ष केसे हो सकते हैं ? ऐसी असंभावना
से मारे आश्चर्य के अप्रतिम हो गया