Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 151, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 151, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 151 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
अभावमुपयाते ते यदैवं भवतस्तनू ।
स्वपतस्ते भ्रमवतः संविदेव विजृम्भते ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
यह अत्यन्त आश्चर्य आज मुझसे कहा है, जो कि मेरे मन में नहीं बैठ रहा है