Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 151, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 151, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 151 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
तस्मात्क तद्गलबिलं विराडात्मा स च क्व ते ।
दग्धो दग्धस्य सौजस्कः सौजस्कस्यैव देहकः ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुनिवर, स्वप्न
मेँ अपने उपदेशकरूप से जिनका आपने मुझसे वर्णन किया था उनकी आप जाग्रत मेँ प्रत्यक्षता कह
रहे हैं और मैं भी प्रत्यक्षतः देखता हूँ यह विचित्र बात मेरी समझ में नहीं आ रही है