Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 151, Verse 52
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 151, verse 52 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 151 · श्लोक 52
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हिन्दी अर्थ
व्याध ने कहा : हे मुनिवर, वहाँपर
उक्त अग्निदाह का क्या कारण उपस्थित हुआ ? वह वन और वे आपके शिष्यगण सबके सब एक
साथ कैसे नष्ट हो गये ?